Friday, August 19, 2022
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भारतीय संस्कृति का एक यह भी रुप है,जो विकसित होते -होते रह गई।इस का विस्तार नहीं होना इस देश के लिए कितना लाभप्रद है

भारतीय संस्कृति का एक यह भी रुप है,जो विकसित होते -होते रह गई।इस का विस्तार नहीं होना इस देश के लिए कितना लाभप्रद है,यह समझा जा सकता है। मिस्त्र या रोम की संस्कृतियां भी प्राचीन थीं पर उनके विनिष्ट होने के कारणों में इस तरह के प्रयोगों का भी हाथ रहा है।वे संस्कृतियां धीरे-धीरे इस अवस्था पर आ गईं,जिस के भग्नावशेष ही दिखते हैं।आधुनिकता ने अपने प्रभाव में ले लिया उन्हें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करें।अगर ऐसा हो भी गया तो इसका चरम क्या है-एकदम नंगा होना!इस के बाद फिर तो आप को लौटना ही होगा अपने नये प्रारंभ पर।ऐसे प्रयोगों से आखिर कौन सा संदेश देना चाहतें हैं आधुनिक युवा। यह संयोग है कि अब इस पर तीक्ष्ण दृष्टि है सरकार की वरना धीरे-धीरे इस विश्वविद्यालय विशेष में जो विकसित हो रहा था,वह भारतीय संस्कृति के पक्ष में नहीं था।हमें भी रहना है कि हमारे बच्चे ऐसे आधुनिक सोच से बचें,तभी कल्याण है-सुप्रभात🙏

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साभार उदय नारायण सिंह

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