डॉ अज्म के काव्य संग्रह से नई पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा

डॉ अज्म के काव्य संग्रह से नई पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा

एक साथ हिंदी और उर्दू में प्रकाशन से सभी को होगा लाभ

फोटो – काव्य संग्रह का लोकार्पण करते अतिथि

छपरा. डॉ. मोअज्जम अज्म ने अपने काव्य संग्रह में जो हौसला दिखाया है, उससे निराश हृदयों को प्रसन्नता मिलेगी. जिले के साहित्यक धरोहर में इजाफा होगा. नई पीढ़ी और कवि स्तरीय रचनाशीलता की ओर आकर्षित होंगे. उक्त बातें बिहार उर्दू एक्शन कमेटी के अध्यक्ष सह कौमी तंजीम के प्रधान संपादक एसएम अशरफ फरीद ने डॉ अज्म के काव्य संग्रह ‘आजीन’ का विशिष्ट अतिथि के रूप में लोकार्पण करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि डॉ मोअज्जम ने संग्रह को उर्दू और हिंदी में एक साथ प्रकाशित कर हिंदी भाषी वर्ग का भी ध्यान रखा है. वहीं हिन्दी भाषी ने बड़ी संख्या में इस आयोजन में भाग लेकर मौलाना मजहर-उल-हक, राजेंद्र बाबू और अन्य पूर्वजों की गंगा-जमुनी परंपरा को मजबूत किया है. ऐसा आयोजन प्रांत और देश में शायद ही कभी देखा जाता है. मोअज्जम अपनी साहित्यिक और सामाजिक दोनों ही जिम्मेदारियों में सफ़ल रहे हैं. आशा है इसे वे और भी आगे बढ़ाएंगे. विशिष्ट अतिथि बिहार विधान परिषद के पूर्व उप सभापति सलीम परवेज ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ मोअज्जम राज्य, देश और फिल्म जगत में अपनी रचना धर्मिता से छपरा का नाम रोशन कर रहे हैं. वह जिला के लिए एक धरोहर हैं. उनकी रचनाओं में कलात्मक और बौद्धिक तत्व के साथ आधुनिकता और आशा का संदेश है. उन्होंने आयोजन के बहाने धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे को मजबूत करने का सफलतापूर्वक प्रयास किया है. डॉ लाल बाबु यादव ने छपरा और करीम चक की राष्ट्रीय एकता का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां की मिट्टी की विशेषता है कि मोअज्जम जैसे विचारधारा वाले लोग पैदा होते हैं जो पूरे देश को प्रेम का संदेश देते हैं. डॉ. जौहर शफीआबादी ने कहा कि अपनी मातृभाषा से प्रेम करना हमारा कर्तव्य है. वहीं अन्य भारतीय भाषाओं के रूप में उर्दू की सेवा करना हमारी जिम्मेदारी है. जो डॉ अज्म सफ़लतापूर्वक कर कर रहे हैं. डॉ अनवारूल होदा ने साहित्य के दृष्टिकोण से डॉ अज्म की शख्सियत और उनकी खिदमात को स्वीकार किया. बिहार उर्दू एक्शन कमेटी के महासचिव प्रसिद्ध लेखक और समालोचक फखरुद्दीन आरफी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि डॉ. मोअज्जम न केवल एक अच्छे शायर हैं बल्कि एक अच्छे इंसान और बुद्धिजीवी भी हैं. उनके माध्यम से छपरा की धरती पर इतने सारे बाकमाल और सकारात्मक सोच के लोग जमा हुए हैं. कोरोना काल के एक लंबे अंतराल के बाद मैं ऐसे आयोजन में आया हूं जिससे मुझे रूहानी शक्ति मिल रही है. उन्होंने वर्तमान समय में उर्दू की स्थिति के संबंध में एक्शन कमेटी के प्रयासों और आंदोलन पर प्रकाश डाला. वरीय शायर शहजाद आलम ने अरबी फारसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसएम रफीक आजम के आजीन पर लिखे प्रस्तावना को बहुत ही आकर्षक और प्रभावी तरीके से पेश किया. मेहमानों का स्वागत मेजबान डॉ. मोअज्जम ने किया. इस अवसर पर एक मुशायरा भी आयोजित किया गया जिसमें मुंबई के सदरे आलम गौहर, पटना के जफर सिद्दीकी, असर फरीदी, मुनव्वर दानापुरी, सीवान के सुनील कुमार तंग, शाहबाज शम्सी, छपरा के दक्ष निरंजन शंभू, रिपुंजय निशांत, शमीम परवेज, सोहेल अहमद हाशमी, सुरेश चौबे, अब्दुल समद भयंकर, रविभूषण हंसमुख, कविंदर कुमार, अली अब्बास, बैतुल्लाह बैत, शालिनी, शाहिद जमाल, प्रो. शकील अनवर, डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह, सुरेश चौबे आदि ने रचनाएं प्रस्तुत किया.

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