मूर्ख व्यक्ति को उल्लू समझा जाता है, जबकि आपकी यह धारणा बिल्कुल गलत है।

पश्चिमी मान्यता के मुताबिक किसी व्यक्ति को मूर्ख बनाने को उल्लू बनाना कहा जाता है। इसका यह मतलब होता की मूर्ख व्यक्ति को उल्लू समझा जाता है, जबकि आपकी यह धारणा बिल्कुल गलत है। उल्लू सबसे बुद्धिमान‍ निशाचारी प्राणी होता है। और उल्लू को भूत और भविष्य का पहले से पूरा ज्ञान हो जाता है। यह माता लक्ष्मी जी का वाहन हैं।

आपको बता दे उल्लू को भारतीय संस्कृति में शुभता और धन संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। जबकि आज अधिकतर लोग इससे डरते हैं। इस डर के कारण ही इसे अशुभ भी माना जाता है। काफी लोग यह तांत्रिक विद्या के लिए कार्य करता है। उल्लू के बारे में देश-विदेश में कई प्रकार की विचित्र धारणाएं फैली हुई है।

जब पूरी ‍दुनिया सो रही होती है तब यह पक्षी जागता है। और यह अपनी गर्दन को 170 अंश तक घुमा भी लेता है। यह रात्री में उड़ते समय पंख की बिल्कुल आवाज नहीं करता है। इसकी आंखें कभी भी झपकती नहीं है। उल्लू का हू हू हू उच्चारण एक मंत्र है।

जनश्रुति के अनुसार प्राणी जगत की संरचना करने के बाद एक रोज सभी देवी-देवता धरती पर विचरण के लिए आए। जब पशु-पक्षियों ने उन्हें पृथ्वी पर घुमते हुए देखा तो बोले कि आपके द्वारा उत्पन्न होने पर हम धन्य हुए हैं। हम आपको धरती पर जहां चाहेंगे वहां ले चलेंगे। कृपया आप हमें वाहन के रूप में चुनें और हमें कृतार्थ करें।

देवी-देवताओं ने उनकी बात मानकर उन्हें अपने वाहन के रूप में चुनना आरंभ कर दिया। जब लक्ष्मीजी की बारी आई तब वह असमंजस में पड़ गई किस पशु-पक्षी को अपना वाहन चुनें। इस बीच पशु-पक्षियों में भी होड़ लग गई की वह लक्ष्मीजी के वाहन बनें। इधर लक्ष्मीजी सोच विचार कर ही रही थी तब तक पशु-पक्षियों में लड़ाई होने लगी गई।

इस पर लक्ष्मीजी ने उन्हें चुप कराया और कहा कि प्रत्येक साल कार्तिक अमावस्या को मैं पृथ्वी पर विचरण करने आती हूं। उस दिन मैं आपमें से किसी एक को अपना वाहन बनाऊंगी। कार्तिक अमावस्या के दिन सभी पशु-पक्षी आंखें बिछाए लक्ष्मीजी की राह देखने लगे, मगर रात आते ही सबको नींद लग गयी।

रात्रि के वक्त जैसे ही लक्ष्मीजी धरती पर पधारी, उल्लू अपनी आदत अनुसार जगा ही हुआ था। उल्लू ने अंधेरे में अपनी तेज नजरों से माता लक्ष्मी को देखा और तीव्र गति से उनके नजदीक पंहुच गया। उनसे प्रार्थना करने लगा कि आप मुझे अपना वाहन स्वीकारें। लक्ष्मीजी ने चारों ओर देखा उन्हें कोई भी पशु या पक्षी वहां नजर नहीं आया। तो उन्होंने उल्लू को अपना वाहन स्वीकार कर लिया। तभी से उन्हें उलूक वाहिनी कहा जाता है।

उल्लू की यह जनश्रुति कुछ संदेश भी देकर जाती है कि माता लक्ष्मी (धन-संपत्ति) कृपा पाने के लिए:-

 1. सही समय का इंतज़ार करना पड़ता है।
  2. दिन-रात मेहनत करना पड़ता है।
  3. शोर-गुल नहीं करना पड़ता है।
  4. दूरदृष्टि रखनी पड़ती है।
  5. शांतचित्त रहना पड़ता है।
   6. कलह का माहौल नहीं रखना पड़ता है।
    7. धैर्य रखना होता है।
    8. दुसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करना होता है।
     9. तेज गति से चलना पड़ता है।
    10. सिर्फ आगे ही नहीं, पीछे भी ध्यान रखना होता है।

               🥀🙏जय महालक्ष्मी🙏🥀
पाठक की नज़र से